विश्व का प्रसिद्ध तीन नेत्रों वाला गणपति मंदिर, जहां पत्र लिखकर पूरी होती है मनोकामना

Updated On: Feb 20, 2018 - 4 महीने पहले
Report By: Goodsamachar.com

विश्व का प्रसिद्ध तीन नेत्रों वाला गणपति मंदिर, जहां पत्र लिखकर पूरी होती है मनोकामना

माधोपुर। इस आधुनिक युग पत्र, चिट्ठी छोड़कर लोग जहां ईमेल और मैसेज करते हैं। वहीं भगवान आज भी अपने भक्तों की अरदास पत्र के जरिए सुनते हैं। ये कहना हमारा नहीं बल्कि संसार के उन लोगों का है, जिनकी आस्था तीन नेत्रों वाले इस गणेश मंदिर पर है। लोगों की इस मंदिर में कितनी श्रद्धा है इसका अंदाजा आप राजस्थान के इस गणेश मंदिर में रोजाना आने वाले सैकड़ों लेटर व स्पीड पोस्ट से लगा सकते हैं। इन लेटरों में और कुछ नहीं बल्कि लोगों की समस्याएं लिखी होती हैं।

कहां है यह मंदिर?

यह गणेश मंदिर राजस्थान सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर है। इस मंदिर में जाने के लिए लगभग 1579 फुट ऊंचाई तय करनी पड़ती है।

इकलौता तीन नेत्रों वाला गणपति मंदिर

बता दें कि देश में मान्यता है कि यहां सिर्फ चार ही गणेश मंदिर ऐसे हैं जो स्वयं से प्रकट हुए हैं। , जिनमें रणथम्भौर के त्रिनेत्र गणेशजी का नाम सबसे पहले आता है। यह मंदिर इसलिए और भी खास है क्योंकि यहां गणेश भगवान के उनके पिता शंकर भगवान की तरह तीन नेत्र हैं। इस मंदिर के अलावा सिद्धपुर गणेश मंदिर गुजरात, अवंतिका गणेश मंदिर उज्जैन एवं सिद्धपुर सिहोर मंदिर मध्यप्रदेश में है। इसके बारे में एक प्रसिद्ध कहानी है कि यहां महाराजा विक्रमादित्य प्रत्येक बुधवार को उज्जैन से चलकर रणथम्भौर स्थित गणेशजी के दर्शन के लिए नियमित रूप से आते थे।

मुगल कला और गजवंदनम् चितयम् पुराण

इतिहासकारों के अनुसार मुगलशासन में इस मंदिर के प्रति लोगों की बहुत आस्था थी। मांगलिक कार्यों में निमंत्रण अन्य सभी कामों के लिए यहां सामान्यजन से लेकर राज-महाराजा तक निमंत्रण लेकर आया करते थे। फिर धीरे-धीरे ये प्रचलन डाक व्यवस्था के इस्तेमाल से चलने लगा। गजवंदनम् चितयम् पुराण में गणेश के तीसरे नेत्र का वर्णन है। मान्यता है कि भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र उत्तराधिकारी स्वरूप सौम पुत्र गणपति को सौंप दिया था। इससे महादेव की सारी शक्तियां गजानन में निहित हो गईं। इसलिए ऐसी मान्यता है कि रणथंभौर के इस मंदिर में महागणपति का ही स्वरूप है।

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