एक फेसबुक पोस्ट ने बदली जिंदगी, लोगों को लोहे और मिट्टी के बर्तनों से स्वस्थ जिन्दगी दे रहीं ये दो महिलाएं

Updated On: Mar 08, 2018 - 3 महीने पहले
Report By: Goodsamachar.com

एक फेसबुक पोस्ट ने बदली जिंदगी, लोगों को लोहे और मिट्टी के बर्तनों से स्वस्थ जिन्दगी दे रहीं ये दो महिलाएं

कोच्चि। अक्सर हमारे बड़े यह बात कहते हैं कि पुराने लोहे के बर्तनों में पकाए हुए खाने का स्वाद ही कुछ और होता है। एक रिसर्च की मानें तो आज के समय में जो बर्तन हम प्रयोग कर रहे हैं उनसे काफी बीमारियां हो रही हैं। यह बात भी साबित हो चुकी है कि लोहे के बर्तनों में भोजन सेहत के लिए काफी अच्छा है। ऐसे में कोच्चि की दो महिलाओं ने एक ऐसी मुहिम छेड़ दी है। कोच्चि की राधिका मेनन और प्रिया दीपक ने सोचा कि पुरानी परंपराओं और पुराने बर्तन को वापस लाने का सही समय है। इसने उन्हें 'द विलेज फेयर नेचुरल कुकवेयर' की स्थापना के लिए प्रेरित किया।

और आ गया नया आइडिया

राधिका ने कहा- मैंने फेसबुक पर मेरी आयरन कड़ाई (वोक) की एक तस्वीर पोस्ट की। इसके बाद हर कोई जानना चाहता था कि आप इसे कहां प्राप्त कर सकते हैं। राधिका को यह जानकर हैरानी थी कि ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता था कि किस प्रकार से लोहे के कुकवेयर का सेवन किया जाए और कैसे उन्हें इस्तेमाल किया जाए। बस यहीं से राधिका को प्रेरणा मिली और राधिका ने सोचा कि क्यों न, कच्चे लोहे के बर्तनों को बेचकर उनकी मदद की जाए। क्योंकि राधिका को लगा कि लोगों के पास से स्वस्थ खाना पकाने के विकल्प गायब होते जा रहे हैं।

कम विकल्प फिर भी कुछ खास करने की चाह

राधिका ने सोचा कि ये 'द विलेज फेयर' को रणनीतिक तरीके से वापस लाने का सबसे अच्छा तरीका है। यह विचार अब खाना बनाने के बर्तनों के बाजार में एक चर्चा का विषय बन गया है, और अब ये महिलाओं के स्व-सहायता समूहों द्वारा घर पर स्वाभाविक रूप से पौष्टिक और सुव्यवस्थित/प्राकृतिक भोजन के बर्तन देता है। प्रिया कहती हैं कि टेफ्लॉन के आने का जो मतलब था कि वह खाना पकाने में तेल को कम करता है लेकिन अब हम जानते हैं कि स्वास्थ्य के लिए केमिकल खराब हैं। पूरे विश्व में लोग टेफ्लॉन से छुटकारा पाना चाहते हैं, लेकिन भारत सहित अधिकांश स्थानों में हमारे पास बहुत कम महत्वपूर्ण विकल्प हैं।

खुद की बर्तनों की डिलीवरी

राधिका ने अपने गांव 'ग्राम चंदा' में मंगलवार के बाजार मेले के बाद अपनी पहल 'द विलेज फेयर' को लगाने का फैसला किया। ये फेयर एक तरह का बाजार ही था जहां ज्यादातर बर्तन और पैन खरीदे गए। इसी नाम (द विलेज फेयर) को फॉलो करते हुए फेसबुक पोस्ट के बाद मई 2015 में एक फेसबुक पेज जारी किया गया। पहले कुछ ऑर्डर बेंगलुरु के थे और दोनों (राधिका और प्रिया) ने उन्हें डिलीवर करने के लिए शहर के सभी रास्तों पर ड्राइव की। कुकवेयर के पहले बैच ने करीब 25 लाख का कारोबार किया और तब से कारोबार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

600 से लेकर 6,000 रुपये तक की कीमत

शिपिंग शुल्क को छोड़कर, 600 से 6,000 रुपये के बीच द विलेज फेयर के प्रोडक्ट्स की कीमत होती है। जिसमें कच्चा लोहा और मिट्टी से बने कूकरवेयर और बर्तन शामिल हैं। जल्द ही पत्थर के बर्तनों को लॉन्च करने की उम्मीद है। प्रिया कहती हैं, दुनिया भर में हम सब 'अच्छे पुराने दिनों' के बारे में बात करते हैं जब चीजें स्वस्थ और बेहतर होती थीं।

फेसबुक बना जरिया

द विलेज फेयर ने एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला प्रक्रिया और बाजार की रणनीति विकसित की है। उन्होंने फेसबुक के माध्यम से परीक्षण करके और बाद में अपनी वेबसाइट और ई-शॉप शुरू कर दी है। उन लोगों के लिए जो उत्पादों को छूना और महसूस करना चाहते हैं, द विलेज फेयर ने महानगरों में स्टोरों के साथ भागीदारी की है। जो जैविक और स्वस्थ रहने वाले लोगों को बढ़ावा देती हैं। टीम चरणबद्ध ढंग से दुनिया भर में इस मॉडल को दोहराने की योजना में है।

हर साल होता 40 लाख रुपये का कारोबार

द विलेज फेयर हर साल लगभग 40 लाख का कारोबार करता है। देश और विदेशों में प्रति दिन लगभग 50 पीस भेजे जाते हैं। खुद से शुरू की गई पहल, हर चीज पर 40 से 50 प्रतिशत के मार्जिन से चल रही है। हर बिक्री का पांच प्रतिशत दवाओं के लिए मेहैक फाउंडेशन को जाता है।



loading...

जरूर पढ़ें