ओम : एक सफर ने बदली जिंदगी की राह, कभी चलाते थे ओला कैब अब इंडियन आर्मी में बने ऑफिसर

Updated On: Mar 12, 2018 - 2 महीने पहले
Report By: Goodsamachar.com

ओम : एक सफर ने बदली जिंदगी की राह, कभी चलाते थे ओला कैब अब इंडियन आर्मी में बने ऑफिसर

पुणे। हर इंसान अपने जीवन में एक अच्छा मुकाम हासिल करना चहता है और इसके लिए वह दिन रात कड़ी मेहनत भी करता है। इस दौरान किसी किसी को उसकी मंजिल आसानी से मिल जाती है लेकिन कुछ लोगों के अनवरत प्रयास के बावजूद भी लक्ष्य उन्हें असंभव सा लगता है। ऐसे में कुछ लोग तो हार मान लेते हैं लेकिन कुछ विरले ऐसे भी होते हैं जो विषम परिस्थितियों में समय और चुनौतियों को टक्कर देते हुए अपना मुकाम हासिल करते हैं। ऐसी ही कहानी है पुणे की सड़कों पर ओला कैब चलाने वाले ओम पैठाने की, जो अब इंडियन आर्मी में अधिकारी बनकर अपने ट्रूप्स को कमांड करेंगे और देश की रक्षा करेंगे।

ओम की कहानी वाकई ऐसी है जो देश के लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनेगी और वे इनसे सीख लेकर अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। ओम पुणे-बेंगलुरू हाइवे पर स्थित तोंडल गांव के रहने वाले हैं और वे इंडियन आर्मी में ऑफिसर बनने से पहले पुणे की सड़कों पर ओला कैब चलाते थे। ओम बीती 10 मार्च को चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से पासआउट हुए 257 कैडेट्स के बैच का हिस्सा हैं और अब वे भारतीय आर्मी में शामिल होकर देश की सेवा करेंगे।

परिवार की थी जिम्मेदारी

ओम ने अपनी पढ़ाई साइंस में ग्रेजुएशन के साथ पूरी की है और उनके पिता एक वॉचमैन थे। इस कारण से उनके परिवार की हालत ज्यादा बेहतर नहीं थी। ओम ने भी अन्य छात्रों की तरह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी पाने के लिए तैयारी शुरू की लेकिन उनके पिता ने एक एक्सीडेंट में अपने दोनो पैर गंवा दिए। जिस वजह से पूरे परिवार की जिम्मेदारी ओम के कंधों पर आ गई और उन्होंने अपने परिवार को सहारा देने के लिए ओला कैब चलाना शुरू कर दिया।

एक राइड ने बदली जिंदगी

ओम मजबूरीवश पुणे की सड़कों पर ओला कैब चला रहे थे और रोज की तरह ही वे अपने ग्राहकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर छोड़ने का काम करते थे लेकिन एक दिन उनकी कैब में एक ऐसा कस्टमर बैठा, जिसने ओम की जिंदगी को बदलने का काम किया। दरअसल एक दिन एक रिटायर्ड कर्नल ने ओम की कैब हायर की और सफर के दौरान दोनों के बीच काफी देर बातचीत हुई। उन्होंने ही ओम को कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज के बारे में बताया, साथ ही यह भी बताया कि कैसे इस परीक्षा की तैयारी करें। जिसके बाद ओम ने कर्नल की बातों से प्रेरणा लेते हुए सीडीएस की परीक्षा दी और पहली बार में ही उनका सेलेक्शन हो गया।

ओम बताते हैं कि अगर उस दिन रिटायर्ड कर्नल से उनकी मुलाकात न हुई होती तो वे आज भी पुणे की सड़कों पर कैब चला रहे होते। अपनी इस सफलता के बाद ओम ने सबसे पहले रिटायर्ड कर्नल को फोन किया और उन्हें अपनी सफलता के बारे में बताया। ओम की सफलता वाकई देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का श्रोत हो सकती है। ओम हालातों और विषम परिस्थितियों को चुनौती देते हुए किस तरह से सफलता के शिखर पर पहुंचे हैं यह वाकई काबिले तारीफ है।



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